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सोमवार, 23 फ़रवरी 2009

जनभागीदारी की मान्यता से अपराध पस्त

वन सुरक्षा समिति दोनाई कला पुनः जोशो-खरोश से अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाने लगी। मैं भी हुलास मह्तो के मामले का अनुसन्धान कार्य शुरू किया क्योंकि त्वरित कारवाई हेतू न्यायालय को अविलम्ब अभियोजन प्रतिवेदन जाना जरूरी था। वन सुरक्षा समिति दोनाई कला द्वारा समर्पित कांड की प्राथमिकी भी प्राप्त हुई थी जो वन विभाग के इतिहास की पहली प्राथमिकी थी। मैंने साक्ष्य के रूप में वन वाद में समाहित किया एवं उनके आवेदन (प्राथमिकी) के आलोक में अनुसन्धान कर अपना अभियोजन प्रतिवेदन वन प्रमंडल पदाधिकारी के माध्यम से न्यायालय के समक्ष उपस्थापित करने में सफल हुआ।
वन वादों का कानूनी प्रक्रिया में संक्षिप्त सुनवाई की व्यवस्था कायम है जिसमें घटना स्थल से जुड़े साक्ष्य (यथा घटना स्थल का नक्शा, अभियुक्त का ब्यान, जप्ती सूची एवं गस्ती दल सदस्यों की गवाही) के आधार पर अभियोजन पत्र सम्रर्पित किया जाता है लेकिन इस घटना में वन सुरक्षा समिति के सदस्यों की प्राथमिकी को संलग्न कर साक्ष्य के रूप में न्यायालय के समक्ष रखा गया एवं सरकारी वकील के माध्यम से इस ओर न्यायालय का ध्यान भी खिंचा गया।
न्यायालय ने भी कड़ा रूख अपनाते हुए मेरे याचणा पर न्यायालय ने हुलास मह्तो के विरूद्ध गिरफ्तारी वारंट निर्गत कर दिया एवं पदमा थाना प्रभारी को गिरफ्तारी में सहयोग देने का निर्देश दे डाला। मैंने तुरंत इसकी सूचना वन प्रमंडल पदाधिकारी को दी एवं वारंट की तामीला हेतू एक प्रमंडलीय जीप की याचणा की। वन प्रमंडल पदाधिकारी ने कारवाई को बल देने के लिये प्रमंडल के दोनों जीपों को ले जाने की अनुमति दे दी जिससे मैं काफी उत्साहित था। उसी दिन करीब 3 बजे सुबह हुलास मह्तो के घर दो जीप की संख्या बल तथा थाना के कुछ चौकीदारों को लेकर छापा मारा, लेकिन अभियुक्त की सतर्कता की वजह से मैं उसे गिरफ्तार करने में सफल नहीं हो सका। ये भी पहली घटना थी कि वन विभाग ने अपने कुब्वत पर पहली गिरफ्तारी वारंट का तामिला करा रहा था जिससे अभियुक्त काफी भयभीत हो गया। कारवाई वन सुरक्षा समिति के पक्ष में हो रहा था और इससे उन्हें समाज में सम्मान भी मिल रहा था जबकि वनों की सुरक्षा पुख्ता हो गयी थी।
कुछ दिनों बाद वन विभाग एवं पुलिस द्वारा हुलास मह्तो की गिरफ्तारी हेतू उसके परिवार पर दविस बढ़ाई गयी और अंततः मजबूर होकर वह न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया जिससे वन मुकदमा पर संज्ञान लेकर न्यायालय द्वारा सुनवाई शुरू हो गयी।
इस घटना के बाद हीं पूरे हजारीबाग वन्य प्राणी आश्रायणी के जंगल में वन सुरक्षा समिति का आधिपत्य कायम हो गया एवं वनों में अवैध पातन पर पूर्ण विराम लग गया। जिससे मुझॆ भी आत्म संतोष एवं कर्तव्य निर्वहण की संतुष्टि मिली। कुछ दिनों बाद वन प्रमंडल पदाधिकारी श्री अरविन्द कुमार, भा0व0से0 की प्रोन्नति होने के उपरांत स्थानांतरण हो गया जबकि उसके कुछ दिनों बाद मेरा भी स्थानांतरण धनबाद वन प्रमंडल में हो गया और मैंने आत्मसंतोष के साथ नये पदस्थापन की ओर प्रस्थान किया कि शायद वन सुरक्षा समिति की परिकल्पना, घटित घटना एवं अनुभव भविष्य में फलदायी बनें।

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर...आपके शब्‍द बहुत जगह टूट जा रहे हैं....जिससे पढने में दिक्‍कत होती है....एडिट में जाकर शब्‍दों के बीच के स्‍पेस को चेक करें....ठीक हो जाएगा.....महा शिव रात्रि की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं..

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  2. आपको नहीं हमे भी आत्‍मसंतोष हुआ।

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