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रविवार, 18 नवंबर 2007

हजारीबाग वन्यप्राणी आश्रयणी में वन अपराध पर अंकुश लगा!

समय बीतने के साथ मज़बूरी में शुरु की गई नौकरी रोचक बनने लगी। वन क्षेत्र पदाधिकारी स्वर्गीय श्री एस एन दुबे मेरे साहस एवं कार्यक्षमता का पुरा इस्तेमाल किया। अब मै सिर्फ अपने परिसर राजडेरवा में गस्ती नहीं कर रहा था बल्कि उनके साथ प्रमंडल से प्राप्त जीप में सवार होकर रात - दिन तीनो परिसर - वहिमर, राजडेरवा एवं पोखरिया में गस्ती कर रहा था तथा वन अपराधियों की धर- पकड़ तेज हो गई थी। रात में वन अपराधियों को गिरफ्तार करते थे एवं सुबह आठ बजे उनका चालान बनाते तथा जेल हाजत भेजने का कार्य करते थे। ये मेरा प्रतिदिन का रूटीन कार्य हो गया। जब पुरा माह समाप्त हुआ तो एक दिन वन प्रमंडल पदाधिकारी अचानक राजडेरवा पहुँच गए। हमलोग दोपहर का भोजन कर वन क्षेत्र पदाधिकारी के साथ आवासीय परिसर में हाफ़ पैंट एवं टी सर्ट पहन कर घूम रहे थे तभी वन प्रमंडल पदाधिकारी का जीप पहुँचा एवं उन्होने हाथ से हमलोगों को ईशारा करते हुए रेस्ट हॉउस पहुँचने को कहा। मै तुरंत तैयार हो कर वन क्षेत्र पदाधिकारी के साथ रेस्ट हॉउस पहुँचा। मुझे देखते ही चहकते हुए बोले - आपलोगों ने तो कमाल कर दिया, इस माह आपने २८ गिरफ्तार केस पकड़ा है । इसी बीच सभी वनरक्षी भी रेस्ट हॉउस पहुँच गये और जब हमने वन अपराधियों से की गयी शक्ति प्रयास का जिक्र किया एवं जंगल कटाई में कमी की बात बताई तो उनकी प्रसन्नता देखते ही बनती थी। ज्ञात हो कि वे वन प्रमंडल पदाधिकारी श्री अरविन्द कुमार , भा० व० से० थे; जो वर्तमान में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, झारखण्ड है। .......... आगे - " जब वन सुरक्षा समिति के गठन की परिकल्पना ने जन्म लिया! "

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